Guru Ji

हजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

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ई ह यूपीए सरकार तू देख बबुआ....

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ई ह यूपीए सरकार तू देख बबुआ……. बस देखते जाईये. अभी तो दो साल और बाकी हैं. इन दो सालों में न जाने कितने गुल और खिलने वाले हैं…. परेशान काहें होते हैं…सब किया-धरा भी तो हमारा ही है..जब हमने ही कुर्सी सौंपी है तो झेलना भी हमीं को है… भस्मासुर को आशीर्वाद देने वाले हमीं हैं तो भस्म भी तो हमीं को होना है…. शिव जी की कथा नहीं सुने हैं का….यदि नहीं सुने हैं तो पंडित जी को बुलाईये और सुनिए. कुछ अपने वेद-पुराणों से सीखिए. वैसे हम भी कौन से बहुत बड़े ज्ञानी महात्मा हैं….कहीं सुने थे तो आप को बता दे रहे हैं..अब कौनो विष्णु जी नहीं आने वाले सुंदरी का वेश धर के..अब आयेंगी भी तो सन्नी लियोन जैसी ही आयेंगी…ई हमें बचायेंगी क्या.. खुद ही भस्म करने पे तुल जाएँगी…

सरकार ने पेट्रोल का दाम क्या बढ़ाया लोग बौखला गये. लगे.. पेट्रोलपम्प पर लाईन लगाने…..ऐसा लगा जैसे आज ही पूरी जिंदगी भर का पेट्रोल अपनी गाड़ी में भरवा लेंगे… होने लगा धरना-प्रदर्शन. पूरे देश में मच गया बवाल… धत…ई भी कौनो बात है… काहें अपनी इनर्जी खराब करने पे तुले हो…इतना मत ताव खाओ….थोडा ठंड रखो….एक तो वैसे ही यूरिया खा-खा के खून पानी हुआ पड़ा है. अरे… जो कुछ बची-खुची है उसे संभाल कर रखो….अभी बहुत कुछ देखना है…. अभी देखा ही क्या है. इससे भी हसीन और बड़े-बड़े मंज़र सामने आने वाले हैं……

हम तो ठहरे निठल्ले… देश-दुनिया की खबर तो रहती ही नहीं है….रमता जोगी,बहता पानी वाला हाल है…..उ तो भला हो हमरे खबरची लाल का जिनसे हमको खबर मिली कि पेट्रोल का दाम बढ़ा है…. वही हांफते-दौड़ते……हाथ में अखबार लिए हुए…… चिल्लाते हुए…. हमारे पास पहुंचे….भईया….पेट्रोल…दाम…..आग…..देश…. हम भी उनकी पूरी बात समझ नहीं पाए. उसकी आधी-अधूरी बात सुन के घबरा गये….

सोचने लगे… लगता है.. कौनो पेट्रोल रिफाइनरी में बम फूट गया है. आग लग गयी है….देश जल कर स्वाहा हो रहा है… लगता है दो हज़ार बारह का परलय आ गया है तभी पूरे देश में आग लग गई है…और मन ही मन प्रसन्न भी हुए… चलो हम तो अभी बचे हुए है… लगता है इस श्रृष्टि के सबसे पुण्य प्रतापी हमीं है…हमारा सीना भी फूल के कुप्पा हो गया…इधर हम अपना खयाली पुलाव पकाने में लगे थे उधर उ हमको झकझोरे जा रहे थे….

हम भी झुंझला के पूछ बैठे…काहें परेशान हो…जब परलय आ ही गई है तो जो होगा देखा जायेगा…

तब उ हम से बोले….

अरे भईया परलय-वरलय नहीं आई है…पेट्रोल का दाम साढ़े सात रूपया बढ़ गया है….पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है…चारों तरफ धरना-प्रदर्शन हो रहा है….

तो होने दो न….दो-चार दिन चिचियायेंगे फिर शांत हो जायेंगे….

कहने लगे…इससे अब और महंगाई बढ़ेगी…आम जनता परेशान होगी…सुनने में आ रहा है केरोसिन,डीजल,गैस सबके दाम बढ़ेंगे. एक तो महंगाई ऐसे ही कहर मचाये हुए है, ऊपर से यह कोढ़ में खाज…..

हम बोले..तो बढने दो…..तुम काहें नाहक ही चिंता में मरे जा रहे हो….जब जनता ‘आम’ ही है तो आम जैसे निचोड़ी ही जायेगी...

फिर बोले…. अरे भाई ई सब गाडियां कैसे चलेगीं…आदमी पेट्रोल भराते-भराते परेशान हो जायेगा…

अब हम से नहीं रहा गया और बोल पड़े…. कौन जरुरत है मोटर गाड़ी से चलने की. देह-देह पर तो गाड़ी रखे हो….बाबूजी स्कूटर से चलेंगे…भईया जी मोटरसायकिल से….बेटवा-बिटिया स्कूटी से… पूरा परिवार कार से…… जब नबाबों का शौक पालोगे तो ऐसा ही होगा. अभी तो पेट्रोल छुआया है आगे-आगे देखते जाओ क्या-क्या छुआते हैं….

अरे उन्होंने ने कौन सा गलत काम कर दिया है…..अरे भाई…देश की तिजोरी खाली हो गई है…घर ले जाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है…दो साल का समय है….आखिर गुज़ारा कैसे होगा. जाहिर सी बात है हमसे-तुमसे ले कर ही  भरेंगे…सरकार का काम ही यही होता है…अपना खजाना भरना हो तो जनता से बसूली करो……ई तो सदियों से होता आया है. प्रजा के ही धन पर राजा मौज करता है….बहुत तकलीफ है तो जाओ तुम भी राजा बन जाओ.. राजा ही क्यों…कलमाड़ी बन जाओ…रेड्डी बन जाओ…येदुरप्पा बन जाओ….कन्निमोझी बन जाओ….मायावती बन जाओ….और भी न जाने कौन-कौन हैं…. जो मन करे सो बन जाओ….मजे करोगे कौनो चिंता नहीं रहेगी….

अरे छोडो मोटर-गाड़ी से चलना. पैदल चलो….साईकिल से चलो…देखते नहीं थे हमारे पुरनिया कैसे मीलों पैदल ही चले जाया करते थे. सेर भर सतुआ (सत्तू) गमछा में बांधे और चल पड़े……ले लउरिया चल देउरिया….उनसे कुछ सीख लो….विजन 20-20 का सपना मत देखो. उनीसवीं सदी में लौट चलो…बहुत सुकून मिलेगा….

आप सब भी निश्चिन्त रहें…शांत रहें….. इस मुगालते में न रहें कि सरकार ने साढ़े सात रुपये पेट्रोल महंगा कर के अपने ऊपर साढ़े-साती मोल ले ली है. सरकार को कुछ नहीं होने वाला. जो भी होना होगा आप सब को होगा. शनि महाराज भी उनके ही फेवर में हैं. आप सब को चाहिए कि शनि महाराज को प्रसन्न करने हेतु कुछ हवन-पूजन कराएँ…. सरकार जो दान-दक्षिणा मांगती है देते जाएँ. आपका कल्याण होगा…..

लउरिया (लट्ठ), देउरिया(जिला-देवरिया)



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46 प्रतिक्रिया

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Adelaide के द्वारा
11/07/2016

Looks like I’ve found something to keep me occupied on National Video Game Day, &#;8t02Kit2en Vs. Zombie” for Android a new Meme – based game looks like it could be fun!

yogi sarswat के द्वारा
28/05/2012

श्री दुबे जी , सादर नमस्कार ! आप सब भी निश्चिन्त रहें…शांत रहें….. इस मुगालते में न रहें कि सरकार ने साढ़े सात रुपये पेट्रोल महंगा कर के अपने ऊपर साढ़े-साती मोल ले ली है. सरकार को कुछ नहीं होने वाला. जो भी होना होगा आप सब को होगा. शनि महाराज भी उनके ही फेवर में हैं. आप सब को चाहिए कि शनि महाराज को प्रसन्न करने हेतु कुछ हवन-पूजन कराएँ…. सरकार जो दान-दक्षिणा मांगती है देते जाएँ. आपका कल्याण होगा….. एक बेहतरीन सटीक एवं सार्थक व्यंग्य ! अभी दो साल बाकी हैं और न जाने इन दो वर्षों में कितना रुलाएगी ये सरकार !

krishnashri के द्वारा
27/05/2012

आदरणीय दुबे जी , सादर , वास्तविकता को उकेरता , सच्चा व्यंग , परन्तु ये समझे तब न . सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई .

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीय कृष्ण जी सादर प्रणाम. समझेंगे….अवश्य ही समझेंगे . बस देश पर चल रही साढ़े साती समाप्त हो जाये. इनका तो वह हाल होगा ये पनाह मांगते फिरेंगे. प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
27/05/2012

आखिर गुज़ारा कैसे होगा. जाहिर सी बात है हमसे-तुमसे ले कर ही भरेंगे…सरकार का काम ही यही होता है…अपना खजाना भरना हो तो जनता से बसूली करो……ई तो सदियों से होता आया है. प्रजा के ही धन पर राजा मौज करता है….बहुत तकलीफ है तो जाओ तुम भी राजा बन जाओ.. हाँ दूबे जी ये जब पैदा होते हैं स्कूल में जाते हैं यही पढ़ते हैं और लूट पाट भर लो कुर्सी मिली तो ..क्या जाने कब कुर्सी पर कोई लात मार दे या विदेश धन पहुंचाते जाते समुद्र में ….. काश और कुछ इन्हें जनता पढ़ा पाती भ्रमर ५

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीय भ्रमर जी सादर प्रणाम. समय आ गया है . अब जनता इन्हें अपनी ही भाषा में पढ़ाएगी.

nishamittal के द्वारा
27/05/2012

अच्छा तीखा व्यंग्य.बेचारों को मिर्ची लग जाय काश

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीया निशा जी सादर प्रणाम लगेगी…अवश्य ही लगेगी. जब तक इनको मिर्ची नहीं लगती मेरा प्रयास जरी रहेगा.

Santosh Kumar के द्वारा
27/05/2012

अजय भाई ,.सादर नमस्कार बेहतरीन व्यंग्य ,..शानदार !!…लेकिन शांत नहीं रहना है ,.इनको चप्पल जूते मारते रहना है ,…शनि महराज इसबार उनका फेवर नहीं करेंगे ,..धीरे चलते हैं लेकिन दुरुस्त चलते हैं ….शानदार रचना पर हार्दिक बधाई

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    संतोष भाई नमस्कार नहीं…शांत नहीं होंगे. आप अपने तरीके से जूते बरसायिये मैं अपने तरीके से बरसाता हूँ. कुछ न कुछ तो हो कर ही रहेगा. आर या पार मेरी यह रचना पसंद आई आपका हार्दिक आभार…

26/05/2012

मुझे मत मरो मेरा क्या कसूर है………. http://satyaprakash.jagranjunction.com/2012/05/25/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8/#comment-१२ किसी भी धर्म के लोग हो उन्‍हे आगे आकर इसका विरोध करना चाहिए और सरकार से भी निवेदन करना चाहिए कि इस तरह के कार्यक्रमो पर रोक लगायी जाय, मै आप सभी का आग्रह करना चाहता हुँ कि आप निम्‍न माबाईल न0 फोन कर इसे राकने का आग्रह करे जिलाधिकारी गोरखपुर 9454417544 आयुक्‍त गोरखपुर 9454417500 एस एस पी गोरखपुर 945440273 आई जी गोरखपुर 9454400209 एस पी आरए 9454401015 योगी आदित्‍यनाथ सांसद गोरखपुर 0551-2255454, 53

चन्दन राय के द्वारा
26/05/2012

अजय साहब , तो आप अब जले पर नमक छिड़क रहे है मित्र , व्यंग का कमाल, बबुआ हमार बोले रहे ई ह यूपीए सरकार तू देख बबुआ

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    चन्दन बाबू, हम काहें जले पर नमक छिडकने लगे. हमरी आदत ही कुछ ऐसी है, उल्टा-पुल्टा बोल जाते हैं. अब जब बोलेंगे तो कुछ मिर्ची वाली बात भी निकलनी ही है.

akraktale के द्वारा
26/05/2012

आदरणीय अजयजी नमस्कार, मुसीबत में भी व्यंग का तडका लागाकर गम भुलाना अच्छा लगा. जीना है तो जीने कि आदत डालो. बधाई.

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीय रक्ताले साहब सादर प्रणाम जीना इसी का नाम है. गम के बीच में कुछ हँस लें यह बहुत बड़ी बात है. प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार.

sinsera के द्वारा
26/05/2012

अच्चा व्यंग्य है अजय जी, आपके उत्तम लेखन पर पूरे सवा रुपये का पेट्रोल निछावर……….. शीशी में सम्हाल कर रख लीजियेगा…आने वाली पीढ़ी को दिखने के लिए नमूना…

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    आदरणीया सरिता जी आपकी आज्ञा शिरोधार्य …….. मेरे इस व्यंग पर आपका हस्ताक्षर हुआ. आपका हार्दिक आभार…..

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
26/05/2012

सुन्दर व्यंगात्मक आलेख अजय जी.देखना है साढ़े साती का चक्कर कब तक चलता है.

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीय झा साहब नमस्कार यह ऐसी साढ़े साती है जिसका चक्र कभी भी समाप्त नहीं होने वाला. एक खतम तो दूसरा शुरू. प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार.

jlsingh के द्वारा
26/05/2012

आदरणीय अजय जी, सादर अभिवादन! बहुत ही खूबसूरत व्यंग्य, दिलोदिमाग को झझकोर देने वाले हैं आपके व्यंग्य! आप तो सचमुच के गुरूजी हैं. हृदय प्रफुल्लित हो गया, आपके आलेख को पढ़कर। आपके व्यंग्य व्यवस्था परिवर्तन में निश्चित ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगें! बधाई…..

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    आदरणीय सिंह साहब सादर प्रणाम आपके इस उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार

26/05/2012

अजय भैया, ई सरकारवा अइसने हइये है…आप ठीक बोले कि हमहीं लोग त इसको हुआं बईठाए हैं…अब अगला चुनउवा में देखिये सब का करता है…एकरे वोट देगा कि बदलेगा…

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    गौरव भाई कुछ नहीं बदलेगा. दो साल का समय है. सब लीप-पोत कर बराबर हो जायेगा.

dineshaastik के द्वारा
26/05/2012

अजय जी बहुत ही खूबसूरत व्यंग, दिलोदिमाग को झझकोर देते हैं आपके व्यंग। हृदय प्रफुल्लित हो जाता है आपके आलेख  पढ़कर। आपके व्यंग  व्यवस्था परिवर्तन में निश्चित ही महत्वपूर्ण  भूमिका अदा करेगें। बधाई…..

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    आदरणीय दिनेश जी सादर नमस्कार मेरा लिखना सार्थक हुआ. हार्दिक आभार…..

vasudev tripathi के द्वारा
25/05/2012

बहुत खूब अजय जी!! ये लातों के देवता बातों से नहीं मानेंगे… अब तो यही लगता है!!!

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    धन्यवाद वासुदेव जी. वास्तव में अब जूतम-पैजार ही एक रास्ता रह गया है. उनकी ही भाषा में उनसे बात करनी होगी. तब संभवतः कुछ सुधार हो.

vikramjitsingh के द्वारा
25/05/2012

अजय भाई…..इतना कुछ हो गया….अरे हम को तो पता ही नहीं चला…. अरे हमारे पास तो स्कूटर, स्कूटी, कार कुछ भी नहीं….घोड़ा है…. उसी पे आते जाते हैं….ट्रेफिक बहुत होता था….सड़क पर….. अब तो ट्रेफिक कम होगा….नहीं होगा……अरे आपने ही तो कहा है…….तेल महंगा हो गया……? हाँ. चलो शांति मिली…..अपना घोड़ा तो अब सरपट भागेगा….. धन्यवाद अजय भाई….खुशखबरी के लिए…. और हाँ…वो कौन हैं…मनमोहन झल्लू….और सोनिया कैंडी को हमारी तरफ से बधाई दे देना….. हमारे घोड़े के लिए….(कहीं साले चने भी न महंगे कर दें….घोड़ा खायेगा क्या……हा…हा….हा…..)

    26/05/2012

    अरे विक्रम भैया, चना भी तो पहिले से ही महंगा है. मेरे दादाजी कहते थे कि चना पहिले घोड़ा खाया करते थे. अब तो यह हम इंसानों को भी नशीब नहीं होता……!

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    विक्रम भाई नमस्कार. जब आप ऐसे ही गायब रहेंगे तो पता कैसे चलेगा. हम तो भईया पैदल चलते हैं. कई लोग साथ हुए तो बैल-गाड़ी से… हमारे बस का तो घोड़ा रखना है नहीं . घोड़ा सवा लाख का और चना अडतालीस रूपया किलो…मेरी मनो तो आप भी बैल गाड़ी रख लो खर्चा कम आएगा. आपकी बधाई पहुंचा दी है. आपको पूछ रहे थे…..हम बताये कि आप उन लोगों के क्रिया-करम की तैयारी में लगे हुए है. जब फुर्सत मिलेगी तो मिलेंगे. ठीक कहा न….

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    सही कहते हो अनिल भाई . आज तो चने के दर्शन हो जा रहे हैं कल को दर्शन भी दुर्लभ होंगे…. यार…. एक बात समाज में नहीं आ रही….जब चना ही नहीं रहेगा तो लोग चने के झाड पर कैसे चढेंगे….. समाधान करने का कष्ट करिये….

MAHIMA SHREE के द्वारा
25/05/2012

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख “अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड ” जिसने आपने featured ” में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है … वो पूरा का पूरा आलेख टाइप (चोरी ) किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के … सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदया ने पूरा आलेख ही चोरी का टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है … तो सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनुपमा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ ” के नाम से “तहलका ” के अंक 31may2012 में प्रकाशित है .. चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इसे बेस्ट ब्लॉग अफ डी विक भी कर देंगे … तो जानना चाहती हूँ आपकी नजर में ये कहाँ तक उचित है .. क्या जो अपनी स्वरचित और लिखित लेख लिखते हैं क्या उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी .. तो फिर हम भी क्यों मेहनत करे … http://kg16.jagranjunction.com/2012/05/23/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    अभी तक ती यहाँ काली माई ही थीं, अब साक्षात् चंडी का अवतार हो गया…. महिमा जी, काहें बच्ची के पीछे पड़ गयीं. बताये होतीं कुछ सेटिंग-गेटिंग करा दिए होते…एक तो ऐसे ही 16kg की बच्ची है आपके कारण उसका वजन 8kg का हो गया. यही तो हमरे देश के कर्णधार हैं. आगे चल कर खुद भी तरक्की करेंगे और देश की भी तरक्की कराएँगे. इनको प्रोत्साहन दीजिए… ऐसे ही लगे रहो बेटा….तुम पर हमें नाज़ है.. हम ही मूर्ख हैं जो बेमतलब की दकियानूसी बातों के पीछे पड़े रहते हैं.

Rajesh Dubey के द्वारा
25/05/2012

हमारी गुस्सा अजीब है. जितनी जल्दी आती है, उतनी ही जल्दी चली भी जाती है. भस्मासुर को एक बार बरदान दे कर पांच साल तक शंकर जी की तरह भागते फिरते हैं. भारतीय सन्दर्भ में देखिये अब आगे क्या होता है.

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    आदरणीय राजेश जी नमस्कार देखना क्या है….. जनता भस्म होती आई है और आगे भी भस्म होती रहेगी. कुछ नहीं बदलने वाला. कुछ नहीं होने वाला. ऐसे ही सरकार मस्त रहेगी और जनता त्रस्त रहेगी. थोड़ी कभी मिर्ची लगेगी तो जनता चीखेगी, चिल्लाएगी. फिर अपने पुराने ढर्रे पर चलने लगेगी.

ANAND PRAVIN के द्वारा
25/05/2012

अजय भाई, नमस्कार का हो कानो काम धाम नै है का…………..जब देखो हाथ वालो को कोसते रहत हो…….. दुई साल बाद टिकट नइखे लेना है का…….. भस्मासुर बनाये है तो का हुआ हम पापी लोगन को का भगवान शिव बुझे हैं…………अरे देवी शान्नी जी और पूनम जी ही देश बचाहियें ………….इ बात खूटे में डाल लो…………अभी तो कुछो नहीं हुआ है…….अभी तो अकाद नम्बरी लाघियें तब देश बुझे की कुछ बढ़ल बा दाम इतना भिन्गाई के जुत्ता नै मारो सरकार को ……मनमोहन बाबू तो बुत सभ्य आदमी हैं ना…..इही से ता दुई बार लोगन लायें उनको……….अब भुगतो

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    आनंद भाई, नमस्कार कहाँ कौनो काम-धाम है. निठल्ले तो बैठे हैं……कुछ माल-पानी बना ही नहीं पा रहे हैं… हम काहें कोसने लगे..न हीं हम जूता मार रहे हैं…कोसें हमरे दुश्मन..हम तो पक्के हितैषी हैं….हाँ मौका मिले तो उनका क्रिया-करम करने से भी न चूकें…जहाँ तक टिकट की बात है. तो टिकट हमारा पक्का है. सही कहते हो भाई…सन्नी और पूनम से ही देश का कुछ हला-भला हो सकता है. कैसे ई हम बाद में बताएँगे. पेट्रोल का दाम बढे..चाहें उफर पड़े उससे हमको का…जितना देंगे उसके चौगुना वसूल लेंगे… उनको दुई बार क्या ….बार-बार लायेंगे….बस देखते जाओ…..

rajkamal के द्वारा
25/05/2012

प्रिय अजय जी ….सप्रेम नमस्कारम ! मैं इस बात को बही मानता की पेट्रोल के बढ़ते दामो का आम आदमी पर कोई असर पड़ता है ….. लड़कियों के पीछे और उनके स्कूल – कालेज के चक्कर लगाने वाले मजनू क्या अब कम चक्कर लगाएंगे ? भाई साहिब जिसको अपने लक्ष्य को पाना है उसके लिए क्या महंगा और क्या सस्ता है …… क्या वोह आम आदमी की श्रेणी में नहीं है आते ?….. :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-)

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    आदरणीय गुरुदेव सादर प्रणाम मैं भी तो यही कह रहा हूँ कि यह चिल्ल-पों सिर्फ दो-चार दिन की है फिर सब अपने-अपने में व्यस्त. मजनुओं के दो-चार चक्कर बढ़ेंगे ही….. कम होने की बात ही बेमानी है….मुझे लगता है मजनुओं की श्रेणी कुछ अलग होती है. आम से हटकर…उनका कर्म और धर्म कुछ अलग ही होता है. उनको इससे फर्क नहीं पडता कि दुनिया में क्या हो रहा है. उनकी निगाहें सिर्फ अपने लक्ष्य पर होती है. मजनू अपना कर्म और धर्म कैसे छोड़ सकते है….यदि छोड़ दें तो उनकी तौहीन है….चाहें लाख तूफा आये अब जान भी चली जाये….

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    26/05/2012

    वाह वाह कितना सुंदर विचारों का आदान प्रदान चल रहा है … वैसे गुरुदेव सही कह रहे है अजय जी .. मजनू आम आदमी न सही आम आदमी का बेटा तो है ना :) और आपकी भी बात सही है

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    27/05/2012

    महिमा जी, मजनू को इस बात से क्या फर्क पडता है की वह आम आदमी का बेटा है या किसी खास का. उसे तो सिर्फ अपना लक्ष्य दिखता है. वह अपनी सारी जुगत अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगाता है. अब यह देखने लगे कि उसका बाप आम है या खास तो उसकी मजनूगिरी धरी की धरी रह जायेगी. वैसे आप यह बताईये इस गुरु-शिष्य संवाद के बीच में आप कहाँ से टपक पड़ीं.

आर.एन. शाही के द्वारा
25/05/2012

अच्छा व्यंग्य. सही कहा, इनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है. सारी साढ़ेसाती हमहीं पर सवार है. अब जवन होई, देखल जाई, जइसे मुर्दा पर एक मन, ओइसे हजार मन, का ? लशियो के कौनों दुःख संताप बुझाए के बा ? चुपचाप हाथ गोड़ पसार के सुतले क काम बा.

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    परम आदरणीय गुरुदेव सादर प्रणाम सत्य वचन हैं आपके. इहे कईले के जरूरत बा.. ठाठ से बारी में बंसवारी के नीचे खटिया बिछा के पछुआ के मज़ा लिहले के कार बा. प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन के लिए…. हार्दिक-हार्दिक आभार….

25/05/2012

“कौन जरुरत है मोटर गाड़ी से चलने की. देह-देह पर तो गाड़ी रखे हो….बाबूजी स्कूटर से चलेंगे…भईया जी मोटरसायकिल से….बेटवा-बिटिया स्कूटी से… पूरा परिवार कार से…… जब नबाबों का शौक पालोगे तो ऐसा ही होगा. अभी तो पेट्रोल छुआया है आगे-आगे देखते जाओ क्या-क्या छुआते……… अरे छोडो मोटर-गाड़ी से चलना. पैदल चलो….साईकिल से चलो…देखते नहीं थे हमारे पुरनिया कैसे मीलों पैदल ही चले जाया करते थे. सेर भर सतुआ (सत्तू) गमछा में बांधे और चल पड़े……ले लउरिया चल देउरिया….उनसे कुछ सीख लो….विजन 20-20 का सपना मत देखो. उनीसवीं सदी में लौट चलो…बहुत सुकून मिलेगा….” मैं तो बस नतमस्तक हो गया भैया जी…….कमाल का व्यंग्य….यह दूसरा मौका है इस मंच पर किसी व्यंग्यात्मक आलेख का….जो सीधे दिल को चरती हुई …..नशों में समां गयी……आश्चर्य की बात है कि दोनों इस कदर प्रभावित करने वाले व्यंग्यात्मक आलेख आप ही द्वारा सृजित…….. तो एक बार प्रेम से बोलो महान भारतीय लोकतांत्रिक गणराज्य की……………………!राजनेताओं की … …………! और अंत में हम महान प्रजाओं की ………………….! हाँ………………हाँ………..हाँ……….!

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    26/05/2012

    अनिल भाई…यदि मेरी यह बात आपके दिल को चीरती हुयी नशों में समायी है तो मुझे पूरा उम्मीद है कि मेरी अन्य बातें भी आपके दिल और दिमाग पर असर डालेंगी. आपने जो इज्जत नवाजी की है उसका मैं तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ.

    27/05/2012

    तलवार में धारहो हो तो उसे चराने के लिए नहीं कहा जाता भैया जी, जहाँ लगाइए वहां चीरते हुए निकल जाती है…………..उसी प्रकार यदि आपकी एनी बातों में भी धार होगी तो निश्चय ही कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी………..!


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