Guru Ji

हजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

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सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं.......(व्यंग)

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सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं……. नहीं सो पा रहे हैं…रात छत पर तारों को टुकुर-टुकुर निहारते ही बीत जा रही है…. बहुत ही कष्ट है भईया….एक तो ये ससुरे मच्छर, ऊपर से यह चिल्ल- पों….. गर्मी अलग से…. रातों की नींद ही उड़ गयी है भाई….हम तो सोच-सोच के हलकान हुए जा रहे हैं कि अब का होगा….यह जो मंज़र मेरी आँखों के सामने घूम रहा है , उसको देख कर ही दिमाग चकरा जा रहा है. गला सूखने लग रहा है…..अभी तक तो सब ठीक ही था, सब जी-खा रहे थे लेकिन अब कुछ-कुछ गड़बड़ लगने लगा है…..

पहले तो मान लीजिये अन्ना जी ही भ्रष्टाचार को उखाड़ने पर तुले थे, हम भी सोचा करते थे…. ,बुजुर्ग हैं….बुढौती का असर है . कुछ दिन बडबड़ायेंगे फिर शांत हो जायेंगे, जैसा की अक्सर होता है. वैसे भी आज-कल बुजुर्गों की बात पर कौन ध्यान देता है. इस कान से सुना और उस कान से निकाल दिया……हम तो हम, हमारे यहाँ बहुत बड़े-बड़े घाघ बैठे हैं, देश तो देश पूरी दुनिया पचा जाएँ …डकार तक न मारें ….. हम भी निश्चिन्त थे. कान में तेल डाले सुने जा रहे थे…..जैसे हमारे परधानमंत्री जी सुना करते हैं, या देखा करते हैं…..

हम भी सोचते थे कि जब तक इन लोगों का आशीर्वाद है तब तक तो हमारा क्या , हमारे किसी भी भाई-बंधू का कुछ भी नहीं बिगड़ने वाला…..जिंदगी ऐसे ही आराम से चलती रहेगी…सब मिल-बाँट के कमाते-खाते रहेंगे…आखिर हमने इनको गद्दी पर बिठाया काहें था…भईया कुछ तुम लूटो… कुछ हम लूटें… यह अलग बात है की तुम मोटा लूटते हो……नेता हो या व्यापारी चाहें हो सरकारी कर्मचारी सभी तो लूटने पर लगे हुए हैं…..हम ही हैं जो थोड़े से संतोष कर लेते हैं…. आखिर ज्ञानी-जन कहते हैं कि नहीं…. “संतोषम परम सुखं”…. जब आवे संतोष धन सब धन धूरि सामान…… हम भी निश्चिन्त थे ….. कुछ नहीं होने वाला, न भ्रष्टाचार ख़तम होगा और न ही हम जैसे भ्रष्टाचारी……

अन्ना जी तक तो ठीक था, अब रामदेव जी भी हनुमान जी की तरह लंका में कूद पड़े…..हम भ्रष्टाचार मिटा कर रहेंगे….कला धन वापस ला कर रहेंगे…. राम-राज्य लायेंगे….. और भी न जाने क्या-क्या करेंगे….. तब भी हम को कौनो चिंता नहीं हुयी…अन्ना जी हुंकार भरते हैं तो भरते रहें, स्वामी जी अलख जागते हैं तो जागते रहें …..हमारे आका भी अकल के कच्चे थोड़े है…. बड़ों-बड़ों को गच्चा दे जाएँ……

पहले तो दोनों जन अलग-अलग कूद-फांद मचाये थे….अब एक साथ आ गए हैं.. कह रहे है कि एक साथ आन्दोलन करेंगे…जन-जाग्रति लायेंगे….भ्रष्टाचार मिटा कर रहेंगे…… यहीं से हमारी चिंता बढ़ने लगी…. सोचने लगे का अब भ्रष्टाचार ख़तम हो जायेगा….?.ई भ्रष्टाचार ख़तम हो जायेगा तो हमारा का होगा…..?.हमारी तो छोडिये, उनका का होगा जो यह मानते हैं , रिश्वत लेना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है…हमारी खानदानी परंपरा है……हमारे लाखों दलाल बंधुओं का का होगा ……जो काम ले- दे कर घर बैठे ही करा देते थे…….आंदोलन के चलते रिश्वत प्रथा बंद हो गई, तो लोगों के काम कैसे होंगे……? बैंक..कचहरी…रेल….जैसे सभी कार्यालय के लोग यदि रिश्वत लेना बंद कर देंगे तो उनका जीना दुश्वार ही होगा, हमारा भी जीना हराम हो जायेगा…अब कौन बैंक में…रेल में …..लाइन लगाएगा….सारी की सारी आराम-तलबी ख़तम हो जाएगी…… अब कैसे होंगे सारे काम……..?
हम तो मान लीजिये अपनी ही दाल-रोटी की सोचते है. उनका का होगा , जिनको हमने अपना आका बना दिया है….इस देश की जिम्मेदारी सऊंप दी….. चलिए कुछ तो देश छोड़ कर भाग जायेंगे, बाकियों को तो जेल होने लगेगी…..देश की सारी जेलें हमारे इन्हीं आकाओं से भर जाएँगी…..
अब आप सब ही बताईये , हमारी चिंता जायज़ है कि नहीं… मेरे जैसे ठलुए लोग इतने बड़े परिवर्तन को कैसे बर्दास्त कर सकते हैं…हम अपनी परंपरा को कैसे तोड़ सकते हैं…..
बहुत दिन से यह चिंता सताए जा रही है, आप सब के सामने नहीं रख पा रहा था. अब रखी है. हमारी ई चिंता के निस्तारण का….समाधान का…. कौनो उपाय ….? हमारी ई चिंता को दूर करने का कष्ट करें, ताकि हम तो चैन से सो ही सकें, हमरे सगे-सम्बन्धी भी चैन से सो सकें………

एक निवेदन और भी….मैं ठहरा एक मूरख…., गंवार….मनई. सब कुछ सीखा लेकिन होशियारी नहीं सीख पाए….गली-गलौज, दंद-फंद से दूर ही रहना पसंद करते हैं….प्रेम की चाहत रखते हैं और प्रेम ही बांटते हैं…..जो भी बोलते हैं खरी बोलते है…. जिसको मेरी बात अच्छी लगे तो वाह-वाह….. नहीं तो पतली गली से निकल लेना…..चाहने वाले और भी हैं……मंजिलें और भी हैं…….



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42 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Stretch के द्वारा
11/07/2016

Ouais enfin quand même. Les Chinois restent premier aux Jeux Olympiques de la tricherie. Et sans aucune contestation possible, dès l&uqrro;ouvertuse même.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
16/05/2012

भैया दुबे जी, जैराम जी की. एसल लिखल बाड़े जस हमही लिखेला कमेंटवा त पोस्ट किनेहेन कहाँ गयेला बतिया त ठीक कहेलू सब जनेला भ्रष्टाचार न जाई पर प्रयास कियेला बधाई आपको हम तो चलेला.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    19/05/2012

    आदरणीय कुशवाहा जी , सादर प्रणाम. जब आपके ही शिष्य हैं तो जाहिर सी बात है, आपकी छाप हम पर पडनी ही है. आपका कमेन्ट कहाँ गया यह तो नेट महोदय या जे.जे. महोदय ही बता सकते हैं. मैं तो स्वयं ही हैरान था कि आपका आशीर्वाद मुझे अब तक क्यों नहीं प्राप्त हुआ. खैर जो भी हुआ, आपका आशीर्वाद प्राप्त हुआ. हम धन्य हो गये. आपका हार्दिक – हार्दिक आभार.

बहुत अच्छा व्यग्य पढ़ के बहुत अच्छा लगा कृपया मेरा नवीनतम ब्लाग पढने का कष्ट करे और अपने विचार दे

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    19/05/2012

    धन्यवाद सौरभ जी. आपके ब्लॉग को अवश्य ही पढूंगा.

MAHIMA SHREE के द्वारा
12/05/2012

सारी की सारी आराम-तलबी ख़तम हो जाएगी…… अब कैसे होंगे सारे काम……..? अजय जी बहुत करारा व्यंग छुपा है इस पंक्ति में …. पूरा हिन्दुस्तान ही सदियों से इस आराम तलब रोग का मरीज है …पहले राजे महराजे आराम तलबी में हिन्दुस्तान को गुलाम बना दिए अब हम जैसे लोकतंत्र के आमजन अपनी आराम तलबी में नेताओ के भरोसे देश को गर्त में डुबो रहे है …… बहुत अच्छा बधाई आपको … और हम देख रहे है इसमें सबसे ज्यादा गलती आपकी आराम तलबी नजर आ ही रही है . जनता भी देख रही … दोनों हाथ पीछे कर आराम कुर्सी पे तलब लगा रहे है .. तो खुश रहिये काहे चिंता करते है ..भ्रस्टाचार कंही नहीं जा रहा है ….

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    13/05/2012

    महिमा जी, चिंता करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. सो हमने भी चिंता व्यक्त कर दी. एक राज की बात बताते हैं , यह चिंता सब नाटक है. हम भी जानते हैं भरष्टाचार का कुछ नहीं बिगड़ने वाला. इसीलिए निश्चिंत होके कुर्सी पे पीठ टिकाये बैठे हैं. आपने सराहा . आपका हार्दिक आभार…

12/05/2012

सादर नमस्कार, भैया जी! सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देती, तुम्हारी प्यार की बाते हमें सोने नहीं देती…..! अब आप ही बताइए, हमारी चिंता जायज है कि नहीं …. मेरे जैसे ठलुवे लोग इतने बड़े परिवर्तन को कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं…हम अपनी परंपरा को कैसे तोड़ सकते हैं……!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    14/05/2012

    अनिल भईया, जब हमारे बतिया पे नींद उड़ गईल, ऊ अहियें त का होई. संभल जा भाई……

satish3840 के द्वारा
11/05/2012

बहुत अच्छा व्यग्य

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    11/05/2012

    सतीश जी नमस्कार, उत्साहवर्धन एवं प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार…..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
09/05/2012

रिश्वत लेना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है…हमारी खानदानी परंपरा है……हमारे लाखों दलाल बंधुओं का का होगा ……जो काम ले- दे कर घर बैठे ही करा देते थे…….आंदोलन के चलते रिश्वत प्रथा बंद हो गई, तो लोगों के काम कैसे होंगे……? बैंक..कचहरी…रेल….जैसे सभी कार्यालय के लोग यदि रिश्वत लेना बंद कर देंगे तो उनका जीना दुश्वार ही होगा, हमारा भी जीना हराम हो जायेगा…अब कौन बैंक में…रेल में …..लाइन लगाएगा….सारी की सारी आराम-तलबी ख़तम हो जाएगी…… अब कैसे होंगे सारे काम……..? प्रिय अजय जी व्यंग्य का पुट लिए सार्थक लेख …अभी तक सब लिखते ही आ रहे हैं जब ट्रेन ..बैंक ..आदि में घंटी बजाना शुरू कर देंगे तो इन भ्रष्टाचारियों को दिन में तारे नजर आयेंगे ..आएगा वो दिन .. आप का शीर्षक तो और कहीं खींचे जा रहा था ….जय श्री राधे भ्रमर ५

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    11/05/2012

    आदरणीय भ्रमर जी सादर प्रणाम सत्य ही परिवर्तन तो होना ही है. अपने अन्दर परिवर्तन लाने के लिए, हर व्यक्ति को मजबूर होना पड़ेगा , शीर्षक किस ओर खींचे लिए जा रहा था, आपने स्पष्ट नहीं किया . हमारी समझदानी भी बहुत कमजोर है. स्पष्ट करने की कृपा करें.

munish के द्वारा
07/05/2012

सुहानी चांदनी रातों में तो सोना भी नहीं चाहिए ……. ! अजय जी ये कहिये की अब तो रातों में सोने की आदत डालनी पड़ेगी…… !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/05/2012

    हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन है , मुनीश जी. बात तो सही कह रहे हैं . भाई योगी जी का “रात सुहानी,झील किनारा …हो तो ना भी सोयें. लेकिन घर में क्या करें. नींद की गोली ले नहीं सकते वो नुकसान करेगी. अब मजबूरी है….रात में सोने की आदत डालनी ही पड़ेगी.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
07/05/2012

मान्य भाई अजय जी, साभिवादन ! चाँदनी नूर में नहाई है, दिन होने का है भरम तुमको ! चाँदनी रात में नींद न आने के वहाने आप ने सार्थक चर्चा की है इस आलेख के माध्यम से | सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/05/2012

    आचार्य जी सादर प्रणाम. क्या करेंगे ? सभी भरम में ही जी रहें . प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार…….

yogi sarswat के द्वारा
07/05/2012

अजय जी नमस्कार, आपकी चिंता स्वाभाविक है ….. काश इसका समाधान सिर्फ चिंता करके होता ……. चिंता तो हम सब कर रहे हैं पर दूसरी तरफ कही हमारा काम ना रुक जाये तो टेबल के निचे से ले दे के काम भी करा रहे हैं …. समस्या भी हमारी वजह से है , चिंता भी हमें ही है , और हल भी हम सबके पास ही है बस एक पहल करने की देर है …..ये आदरणीय परवीन मालिक के शब्द हैं और मेरे विचार भी इसी में समाहित हैं !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/05/2012

    योगी जी नमस्कार. आप भी मेरी चिंता में शामिल हुए , आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…….. यदि चिंता स्वाभाविक है तो पहल की अत्यंत ही आवश्यकता है. सिर्फ दूर से बैठ कर तमाशा देखने से काम नहीं चलने वाला . हमें शुरुआत करनी ही होगी……नहीं तो ऐसे ही हम पिसते रहेंगे और हमारी आने वाली पीढियाँ भी……

rekhafbd के द्वारा
07/05/2012

अजय जी ,बहुत ही बढ़िया व्यंग ,भ्रष्टाचार खत्म हो गया तो कईयों की रातों की नींद उड़ जाए गी ,अच्छे लेख और प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/05/2012

    यही तो हमारी चिंता है. इतना बड़ा परिवर्तन कैसे बर्दास्त कर पाएंगे. प्रोत्साहन एवं प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार…….

akraktale के द्वारा
07/05/2012

आदरणीय अजय जी, व्यंग का पुट लिए बढ़िया आलेख. रिश्वत लेने वाला एक और देने वाले अनेक. जब तक देने वाले ही नहीं सुधारते लेने वाले को तो निश्चिन्त हो कर सोना चाहिए. शायद आज मच्छरदानी लगाना भूल गए हैं.बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/05/2012

    आदरणीय रक्ताले साहब सादर प्रणाम. इस चिंता में होश ही नहीं रह रहा है. मच्छरदानी क्या बहुत कुछ भूल जा रहे हैं. आप भी मेरी इस चिंता में सरीक हुए आप का हार्दिक आभार……

Rajkamal Sharma के द्वारा
06/05/2012

अच्छा तो आपमें इस बिमारी के कीटाणु भी प्रचुर मात्रा में है आज ही पता चला और जान कर मन गार्डन -२ हुई गवा भैया मुबारकबाद मेरी तरफ से भी

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    गुरुदेव सादर प्रणाम , अभी नातेदारी नयी-नयी है , धीरे-धीरे सब जान जायेंगे और गुरु-शिष्य का रिश्ता भी मजबूत होता जायेगा . मुबारकबाद और तारीफ के लिए तहेदिल से शुक्रिया…….

mparveen के द्वारा
06/05/2012

अजय जी नमस्कार, आपकी चिंता स्वाभाविक है ….. काश इसका समाधान सिर्फ चिंता करके होता ……. चिंता तो हम सब कर रहे हैं पर दूसरी तरफ कही हमारा काम ना रुक जाये तो टेबल के निचे से ले दे के काम भी करा रहे हैं …. समस्या भी हमारी वजह से है , चिंता भी हमें ही है , और हल भी हम सबके पास ही है बस एक पहल करने की देर है …..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    परवीन जी नमस्कार, फिर देरी किस बात की है. चलिए पहल कर ही दिया जाये….. हम सुधरेंगे…जग सुधरेगा…….. प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार….

चन्दन राय के द्वारा
06/05/2012

अजय जी, बहुत समय बाद आते हो , पर ऐसी बात कहते हो उन दिनों की याद बन कर रहती है कमाल के भाव और शब्द

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    चन्दन भाई, ऐसा नहीं है…हम तो हमेशा ही यहीं इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं. इस गली ना आयें तो चैन ही नहीं मिलता. आप सब का प्रेम इधर ही खींचे रहता है.आपके यही दो बोल तो कुछ आगे लिखने की प्रेरणा देते है…….

shashibhushan1959 के द्वारा
06/05/2012

आदरणीय अजय जी, सादर ! “”जिसको मेरी बात अच्छी लगे तो वाह-वाह….. नहीं तो पतली गली से निकल लेना…..चाहने वाले और भी हैं……मंजिलें और भी हैं…….”" वाह..वाह…! वाह..वाह…! वाह..वाह…! वाह..वाह…! वाह..वाह…! वाह..वाह…! हार्दिक बधाई !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    आदरणीय शशिभूषण जी सादर प्रणाम आपकी इस वाह..वाह…ने तो मेरे दिल को बल्लियों उछाल दिया….. उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार……

Santosh Kumar के द्वारा
06/05/2012

अजय भाई ,.सादर नमस्ते बेहतरीन व्यंग्य ,..समाधान यही है कि भ्रष्टाचार को कानूनी संरक्षण मिले ,.जन हित में एक भ्रष्टाचार प्रोत्साहन कमिटी बने ,.भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने के लिए शाहरुख़ खान और कैटरीना कैफ को ब्रांड अम्बेसडर बनाया जाय ,..और हो सके तो इसका विरोध करने वालों के खात्मे के लिए सी बी आई की स्पेशल ब्रांच बनायी जाय ,….कहिये तो अपनी मांग बदल दूं !!!……बहुत बधाई

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    संतोष भईया, नमस्कार……… आप के विचारों से पूरी सहमति है……अब ऐसा ही कुछ करना पड़ेगा.. अब आपके बारे में क्या कहें…..प्रवीण भाई की प्रतिक्रिया के नीचे अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी है……. साथी हाथ बढ़ाना…… उत्साह-वर्धन के लिए धन्यवाद्………

dineshaastik के द्वारा
06/05/2012

अजय भाई नमस्कार, कहते हैं हमने न सीखी होशयारी और हमसे भी ज्यादा होशयार। भाई आप तो हैं बहुत अच्छे व्यंगकार। दोंनो एक  साथ …बधाई और  आभार….

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    आदरणीय दिनेश जी नमस्कार……… अरे….भईया जी हम कौन सा तुर्रम खां हैं. कभी-कभार लिख दिया करते हैं….. प्रोत्साहन एवं प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार……

ANAND PRAVIN के द्वारा
05/05/2012

अजय भाई…………….राम राम का बताएं हमरी भी चिंता आपही के जइसन है………..खाली बता नहीं रहें थे इ लोगन को कुच्छो समझ में थोड़े आता है…………..झूटे फुसे खाली आन्दोलन कर रहें है…….उ तो भला हो सोनिया मैया का और उ रहूल्वा का जो हम सब अभी तक ज़िंदा है …………अबकी ध्यान रहे अपना हाँथ सिर्फ हाँथ के साथ………….और इ बात कौनो से ना कहना……………नहीं तो बहोत जुत्ता पडेगा………..और मुरख मंच वाला भैया को तो पता भी ना लगे………..का पता आसरे काका को कह हमारी ही पोल खोल दे

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    राम-राम प्रवीण भाई…..राम-राम……हम तो सोच रहे थे खाली हमीं चिंतित है चलो एक से भले दो……भैया उन लोगों की कृपा है तभी तो ई देश चल रहा है…….. आगे का होगा भगवान मालिक है….. मूरख मंच वाले भईया तो रोज़ दिल्ली का चक्कर लगाये पड़े हैं…..ठीक कहते हो भाई….कहीं उनको पता चला तो साडी पोल-पट्टी खोल कर ही रख देंगे……उनसे भी बच के ही रहना होगा…..हम तो इस फ़िराक में हैं कि उनको भी कुछ ले-दे कर अपनी ही जामत में शामिल कर लें…..जब अपनी बिरादरी में शामिल हो जाएँगी तो कौनो दर कि बात नहीं रहेगी……. भईया साथ आये हो तो छोड़ना न……ज्योति से ज्योति जागते चलो……..इस देश की लुटिया डुबाते चलो……..

nishamittal के द्वारा
05/05/2012

बहुत अच्छे अजय जी अच्छी प्रस्तुत्यी,आपने कैसे कह दिया सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी आप तो होशियार हैं सबको दुरुस्त करने वाले

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    आप भी न निशा जी…..हम अब तक अपने आप को तो दुरुस्त कर ही नहीं सके, औरों को क्या करेंगे. यह आप का आशीर्वाद और प्रेम है जो ऐसा कह रहीं हैं…… प्रोत्साहन और प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार…….. सादर प्रणाम…….. नमन……

RAHUL YADAV के द्वारा
05/05/2012

अजय सर प्रणाम….. लेखन और लेखन का अंदाज दोनो ही सराहनीय है ….कारण रचना पूर्णतया व्यावहारिक है ।

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    06/05/2012

    राहुल जी नमस्कार. सराहना के लिए हार्दिक आभार……….


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