Guru Ji

हजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

16 Posts

1924 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9629 postid : 144

देश पुकार रहा है........अब तुम्हारी बारी है....

  • SocialTwist Tell-a-Friend

biogrophy-bg हर राष्ट्र अपनी संस्कृति, अपनी भाषा , अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध होता है. परन्तु हमारे राष्ट्र में क्या हो रहा है? जो काम कभी विदेशी आक्रमण-कारियों ने किया वही काम हमारे अपने, इस देश के वे कर्णधार कर रहे है, “जिनको हमने इस देश की बाग-डोर सोंपी. जिन्हें हमने प्रतिष्ठित किया……जिन्हें हमने अपना माननीय बनाया”…वही लूट-खाशोट, वही अत्याचार, वही भ्रष्टाचार…….. हमारे इन कर्णधारों ने पहले हमें धर्म के आधार पर बांटा, फिर जाति के आधार पर बांटा. समाज में वैमनस्यता पैदा करने का काम किया. इन्हों ने भी वही नीति अपना रखी है, जो कभी अंग्रेज किया करते थे., बांटो और राज करो…

इनकी हिमाकत तो देखिये, ये देश के गद्दार… खुद को लोकतंत्र का रक्षक कहते हैं, और जो सच्चे, ईमानदार, राष्ट्र-भक्त हैं उन्हें देश-द्रोही, अलोकतांत्रिक करार देते हैं. अर्थात हम देश- हित की बात करते हैं तो देश-द्रोही. हम अपने समाज, अपनी संस्कृति की रक्षा की बात करें तो अलोकतांत्रिक. हम अपने सनातन धर्म की रक्षा की बात करें तो हमें दक्षिण-पंथी आतंकवादी घोषित किया जाता है. हमें चरम-पंथी कहा जाता है.

अर्थात हम इनका महिमा मंडन करें तो लोकतान्त्रिक. हम विदेशी संस्कृति का, विदेशी भाषा का,विदेशी खान-पान का,विदेशी आचार- व्यवहार का महिमामंडन करें तो लोकतान्त्रिक अन्यथा अलोकतांत्रिक……images3

विदेशियों ने तो हमें नष्ट करने के लिए ऐसा किया. वे हमारी संस्कृति में, हमारी भाषा में, हमारे समाज में विकृति पैदा करना चाहते थे. और उन्होंने ऐसा किया ….उनका तो उद्देश्य ही था ” बांटो और राज करो”……. जितना लूट सकते हो लूट लो……. कितनी शर्मनाक बात है कि वही कार्य हमारे अपने इस देश के कर्णधार कर रहे हैं. इनको इस देश से या फिर इस देश की संस्कृति की रक्षा से, संप्रभुता की रक्षा से कोई सरोकार नहीं है. ये विदेशियों के हाथों बिके हुए, अंग्रेज-परस्त लोग, इनका सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, इस देश को लूटना…….. इन्हीं की देन है जो आज देश में चारों तरफ लूट है….., अराजकता है…….अत्याचार है…., अशांति है………भ्रष्टाचार है……….देश में तो लूट मची ही हुयी है. हमारी संस्कृति पर भी कुठाराघात हो रहा है., समाज में विकृति पैदा की जा रही है.

इसके जिम्मेदार हम स्वयं भी हैं. कहने को तो हम स्वतंत्र हैं, परन्तु हम आज भी हम मानसिक रूप से इन स्वदेशी “विदेशियों” के सामने नतमस्तक हैं, परतंत्र हैं….हमने ही इनको यह ताकत दी है….. क्यों हमने इन्हें अपना रहनुमा बना दिया….. ? क्यों हम अपनी संस्कृति, अपने समाज में ज़हर घोलने दे रहे हैं….? क्यों हम इनके हाथ की कठपुतली बन गए हैं……? क्यों हम कायरों की तरह अपने इस देश को लुटते देख रहे हैं…..? क्यों हम अपने समाज को विद्ध्वंश होते देख रहे हैं…..? कहाँ गए हमारे वो आदर्श….? कहाँ गयी हमारी नैतिकता…….? कहाँ गए हमारे वो संस्कार……? जिस पर हमें कभी नाज़ था………
images1 हमारे इन कर्णधारों ने तो अपना ज़मीर, अपना इमान बेंच दिया है…… क्या हम भी बिक चुके हैं……….? क्या हमारे भी जज्बात मर चुके हैं……..? अब बस…. बहुत हो चुका….. बहुत सो चुके….. समय आ गया है, जागने का….. देश- द्रोहियों को सबक सिखाने का…..हमारे समाज में, हमारी संस्कृति में विकृति पैदा करने वालों को सबक सिखाने का……इनको इनकी औकात दिखने का….. अपनी ताकत दिखाने का……बहुत विश्वास किया इन पर…….अब इन पर भरोसा नहीं रह गया है…..अब भी सजग हो जाओ….. अपने मूल्य को पहचानो…, अपने आप को पहचानो………तुम ही आजाद हो…. तुम ही भगत सिंह हो…… तुम ही लक्ष्मीबाई हो…… गाँधी जी के रूप में अन्ना और विवेकानंद जी के रूप में स्वामी रामदेव जी तो रण-क्षेत्र में आ चुके हैं…. ….. रणभेरी बज चुकी है……देश पुकार रहा है……..अब तुम्हारी बारी है….आगे बढ़ो…. अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए….. अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए…….. अपने समाज की रक्षा के लिए……. अब यदि नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं….. जब हम पुनः गुलाम हो जायेंगे… आर्थिक रूप से गुलाम…… सामाजिक रूप से गुलाम…… सांस्कृतिक रूप से गुलाम……….



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (26 votes, average: 4.81 out of 5)
Loading ... Loading ...

67 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Xaria के द्वारा
11/07/2016

F*i&2nk#8c17; tremendous things here. I am very glad to see your post. Thanks a lot and i’m having a look forward to touch you. Will you kindly drop me a mail?

jalaluddinkhan के द्वारा
19/04/2012

भ्रष्टाचार देश का सबसे बड़ा मुद्दा है.इसे जड़ से ख़त्म करने के लिए हमें देश की पुकार सुननी ही पड़ेगी.केकिन सिर्फ किसी नेतृत्व के पीछे खड़े होकर नारा लगाकर ही हम इस समस्या से निजात नहीं पा सकते,इसके लिए हम जहाँ हैं,जिस स्तर की क्षमता रखते हैं,भ्रष्टाचार को रोकने की उस स्तर की कोशिश ज़रूर करें.आपने बेहद अच्छा लिखा हमें भ्रष्टाचार के विरुद्ध होने वाले हर आन्दोलन का हिस्सा भी बनना है और उसका मन-आचरण से समर्थन भी करना है.एक अत्यंत सार्थक रचना के लिए आपको नमन.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    19/04/2012

    धन्यवाद् खान साहब. जागरूकता तो अपने ही अन्दर लानी पड़ेगी.

Tamanna के द्वारा
18/04/2012

बहुत बढ़िया लेख अजय जी… मैं तो पहले ही आपसे कह चुकी हूं आपके लेखन में दम है.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/04/2012

    शुक्रिया तमन्ना जी……..

yogi sarswat के द्वारा
17/04/2012

मित्र अजय जी , आपकी रचनायें देश की सोई हुई कौम को जगाने का कार्य कर सकती हैं , और आप बखूबी ये कार्य कर भी रहे हैं ! आप के जैसी रचनाओं की आवश्यकता इस समाया देश को है ! आपकी रचनायें लहू को गर्म बनाये रखती हैं ! लिखते रहिये !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/04/2012

    बस ऐसे ही कृपा दृष्टि बनाए रखिए । आगे-आगे देखिये होता है क्या ?

minujha के द्वारा
17/04/2012

अजय जी कल भी प्रतिक्रिया देने की कोशिश की थी पर ना हो पाई देशवासियों को जगानेका पुनीत कार्य करता एक जोशीला और सार्थक आलेख

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/04/2012

    आभार मीनू जी. क्षमा चाहेंगे. कुछ तकनीकी गड़बड़ी हो गयी थी. इस वजह से पोस्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हो पा रही थी. समय दिया. बहुत-बहुत धन्यवाद्. ऐसे ही आशीर्वाद बनाये रखिये.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
17/04/2012

सुन्दर आलेख,अजय जी.बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/04/2012

    धन्यवाद झा साहब। आभार….

vasudev tripathi के द्वारा
16/04/2012

आदरणीय अजय जी, “देश पुकार रहा” शीर्षक देखकर इधर आना ही पड़ा… निश्चित रूप से देश पुकार रहा है और आर्त स्वर में पुकार रहा है!!! यह हमारा सभी का दायित्व है कि जहां भी हैं वहीं खड़े हो जाएँ अन्यथा इतिहास को बदला नहीं जा सकता…!!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    16/04/2012

    सही कहते हैं। स्वागत है आपका.

rekhafbd के द्वारा
16/04/2012

अजय जी, जोशीला आलेख ,”अब बस बहुत हो चुका,बहुत सो चुके ,समय आ गया है जागने का ” जागरूकता के संदेश के लिए आभार ,बधाई

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    16/04/2012

    शुक्रिया रेखा जी

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
16/04/2012

अजय जी, नमस्कार- आपके लेख से मैं बहुत प्रभावित हूँ. अच्छा लिखा है आपने.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    16/04/2012

    मेरा लिखना सार्थक हुआ। हार्दिक आभार….

13/04/2012

यह आवाज़ गूंजती रहने चाहिए बस, नींद तो टूट कर ही रहेगी.. सार्थक प्रस्तुती पर बधाई.. सादर.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    14/04/2012

    हौसला-अफजाई के लिए शुक्रिया टिम्सी बहन. सिर्फ बधाई देने से काम नहीं चलने वाला. मेरे गुण-दोषों पर भी प्रतिक्रिया देनी होगी. आभार……

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
12/04/2012

बहुत सो चुके….. समय आ गया है जागने का….. देश- द्रोहियों को सबक सिखाने का…..हमारे समाज में, हमारी संस्कृति में विकृति पैदा करने वालों को सबक सिखाने का……इनको इनकी औकात दिखने का….. अपनी ताकत दिखाने का……बहुत सो चुके….बहुत विश्वास किया इन पर…….अब इन पर भरोसा नहीं रह गया है…..अब भी सजग हो जाओ….. अपने मूल्य को पहचानो…, अपने आप को पहचानो…… जोश और जूनून को पंख लगता लेख आज इसी की जरुरत है ..सुन्दर ..जय श्री राधे भ्रमर ५

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    13/04/2012

    जय श्री राधे ….

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
12/04/2012

बहुत सो चुके….. समय आ गया है जागने का….. देश- द्रोहियों को सबक सिखाने का…..हमारे समाज में, हमारी संस्कृति में विकृति पैदा करने वालों को सबक सिखाने का……इनको इनकी औकात दिखने का….. अपनी ताकत दिखाने का……बहुत सो चुके….बहुत विश्वास किया इन पर…….अब इन पर भरोसा नहीं रह गया है…..अब भी सजग हो जाओ….. अपने मूल्य को पहचानो…, अपने आप को पहचानो…… जोश और जूनून को पंख लगाता लेख..बहुत सुन्दर .आज इसी ताजगी की जरुरत है ……जय श्री राधे …. भ्रमर ५

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    13/04/2012

    अहोभाग्य मेरे जो आप पधारे. जय श्री राधे ….

अब्दुल रशीद के द्वारा
11/04/2012

आदरणीय अजय जी नमस्कार यकीनन अब आम जनता की बारी है

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    11/04/2012

    स्वागत है रशीद जी. अवश्य…. प्रतिक्रिया की लिए आभार…..

ANAND PRAVIN के द्वारा
10/04/2012

अजय भाई, नमस्कार बहुत ही वाजिब सवाल आपके………….हम उतने भी लाचार नहीं जितने आज दिख रहें है……… नेताओं को अपनी परिभाषा सुधारनी ही होगी अन्यथा उनका अंत निकट ही है………..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    10/04/2012

    प्रवीण भाई, स्वागत है. व्यस्वथा परिवर्तन तो होना ही है. आज नहीं तो कल.

sanjay dixit के द्वारा
09/04/2012

सार्थकता और संवेदनशीलता से परिपूर्ण लेख अजय जी,सचमुच एक धमाके की जरूरत है बहरों को सुनाने के लिए

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    09/04/2012

    दीक्षित जी, सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार.

satyakashi के द्वारा
09/04/2012

महोदय विश्व के अंतिम शास्त्र : विश्वशास्त्र के बारे में अधिक जानने के लिए देखे – http://satyakashi.jagranjunction.com/ http://bigratio.com/?Vishwshastra—Final-Knowledge-636737

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    09/04/2012

    अवश्य महोदय.

Rajkamal Sharma के द्वारा
08/04/2012

प्रिय अजय जी …… सप्रेम नमस्कारम ! आपके इस लेख को मिली रेटिंग्स इस बात को ज़ाहिर कर रही है की देश भले ही जागरूक न हुआ हो लेकिन ब्लागर्स जरूर जागरूक हो गए है ….. जोकि किसी हद तक अच्छी बात कही जानी चाहिए ……. रही बात बिक जाने की तो हम जो चुनावो के वक्त अपनी वोट बेचते है तभी तो इन नेताओं को देश को बेचने का बेशकीमती मौका मिलता है….. सिस्टम को बदलने की बात समाज में जाग्रति लाये बिना + उसको जागरूक किये बिना कोई भी रंग नहीं ला सकती है ….. ओजस्वी लेख पर मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    09/04/2012

    गुरुदेव प्रणाम, हम तो धन्य हो गए प्रभु जो इतना ढेर सारा आशीर्वाद प्रदान किया. आपकी बातों से सहमत. आशीर्वाद बनाये रखियेगा.

चन्दन राय के द्वारा
08/04/2012

अजय जी सादर नमस्कार, खूब जगा रहे है देशवासियों को , मित्र आप जैसे युवा लोगी की कर्मठ शक्ति की जरुरत है , मित्र, प्रतीक्षा करा करा कर लिखते हो

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    08/04/2012

    चन्दन बाबू, सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. मुझे तो ऐसा लगता है कि आप ही कहीं गुम हो जाया करते हैं. मैं तो यहाँ पर सदैव ही उपलब्ध हूँ.

ajay kumar pandey के द्वारा
08/04/2012

आदरणीय अजय जी आपकी रचना अच्छी है कृपया आप श्रीमती पुष्पा पाण्डेय जी के ब्लॉग में जाकर जागरण चालीसा जरुर पढ़े धन्यवाद

Kumar Gaurav के द्वारा
07/04/2012

अजय जी सादर नमस्कार बहुत जोशीले अंदाज में आपने देश को आवाज दी है. आज हमें इसी जागरूकता की जरूरत है.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    07/04/2012

    गौरव जी नमस्कार, अवश्य ही जागरूक होने की आवश्यकता है. सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद्.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
04/04/2012

अजय जी, नमस्कार ! उनमें और इनमें कोई विशेष अंतर नहीं है | फ़र्क सिर्फ इतना है कि वे देश के बाहर के थे और ये देश के अन्दर के हैं | समसामयिक व उत्कृष्ट आलेख के लिए बधाई ! पुनश्च !!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    04/04/2012

    आभार……आशीर्वाद एवं प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद्…..

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
04/04/2012

अजय जी ! नमस्कार , बड़े जोशीले शब्दों में रणभेरी बजाई है.वह दिन दूर नहीं जब इनकी चूलें हिल जाएंगी और देश को लूट-खसोट कर अपने घरों को भरने वाले बेनकाब होंगे.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    04/04/2012

    अवश्य ही…..

yogi sarswat के द्वारा
04/04/2012

रणभेरी बज चुकी है……देश पुकार रहा है……..अब तुम्हारी बारी है….आगे बढ़ो…. अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए….. अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए…….. अपने समाज की रक्षा के लिए……. अब यदि नहीं चेते तो वह दिन दूर नहीं….. जब हम पुनः गुलाम हो जायेंगे… आर्थिक रूप से गुलाम…… सामाजिक रूप से गुलाम…… सांस्कृतिक रूप से गुलाम………. बिलकुल सही कहते हैं अजय जी , रंभेदी तो बज ही चुकी है योधा भी मैदान में हैं ! बस परिणाम आना बाकी है !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    04/04/2012

    योगी जी सत्य ही सार्थक परिणाम आयेगा. परिवर्तन सुनिश्चित है. प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार…..

dineshaastik के द्वारा
04/04/2012

संतोष जी के विचारों से पूर्णतः सहमत…. अजय  जी जन जागृति पूर्ण  आलेख   के लिये बधाई….

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    04/04/2012

    दिनेश जी, प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद्.

के द्वारा
03/04/2012

शॉबाश

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    आपका आभार…..

akraktale के द्वारा
03/04/2012

अजय जी नमस्कार, आपने बहुत अच्छी बात कही है. जो उपाय विदेशी यहाँ राज करने के लिए आजमाया करते थे आज वही हमारे बीच के नेता आजमा रहे हैं.जो तब भी निंदनीय था और आज भी निंदनीय है.अवश्य ही इनको सबक सिखाना ही चाहिए.सार्थक सन्देश देता आलेख. बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    आपका प्रोत्साहन मिला मेरा लिखना सार्थक हो गया. आपके ही प्रोत्साहन से मैं अपने इन विचारों को विस्तृत स्वरुप दे पाया हूँ. आप का अत्यंत ही आभारी हूँ….

के द्वारा
03/04/2012

कौरव आज लाखो में हैं…क्रष्ण घिरे हुए और पांडव सोए हुए हैं…. अब उठना तो होगा ही. 

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    उठो….. जागो……और लक्ष्य को प्राप्त करो…… स्वागत है आपका…. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्….

Santosh Kumar के द्वारा
03/04/2012

अजय भाई ,..बहुत जोशीला प्रेरक आवाहन ,….ये विदेशियों के हाथों बिके हुए, अंग्रेज-परस्त लोग, इनका सिर्फ और सिर्फ एक ही मकसद है, इस देश को लूटना…….. इन्हीं की देन है जो आज देश में चारों तरफ लूट है….., अराजकता है…अत्याचार है…., अशांति है………भरष्टाचार है……….देश में तो लूट मची ही हुयी है. हमारी संस्कृति पर भी कुठाराघात हो रहा है., समाज में विकृति पैदा की जा रही है….स्थिति बदलेगी ,.हम बदलेंगे ..हार्दिक बधाई

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    अवश्य ही…. संतोष भाई.. प्रोत्साहन के लिए आभार…

03/04/2012

हम देश के गद्दार… खुद को लोकतंत्र का रक्षक कहते हैं, और जो सच्चे, ईमानदार, राष्ट्र-भक्त हैं उन्हें देश-द्रोही, अलोकतांत्रिक करार देते हैं. अर्थात वो देश- हित की बात करते हैं तो देश-द्रोही……अब अच्छा लग रहा हैं….अब जो गद्दार छुट रहें थे वो भी इसमें आ गए…….अजय भैया एक आपसे विनती हैं. कृपया अपना मेल चेक करना चाहें……

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    जी भईया जी, अभी देखता हूँ. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……

MAHIMA SHREE के द्वारा
03/04/2012

रणभेरी बज चुकी है……देश पुकार रहा है……..अब तुम्हारी बारी है….आगे बढ़ो…. अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए….. अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए…….. अजय जी नमस्कार , बहुत बढ़िया….आज का समाज विशेषकर युवा वर्ग पहले ज्यादा सजग है..वो आज देश के हर मुद्दे पर अपना मत बना रहा है..अत: वो दिन दूर नहीं ..जब फिर से समाज में बदलाव आएगा..जो सड़ गल रहा है.(सभी तरह के भ्रष्टता ). उसे फेंक दिया जायेगा…. लिखते रहे…….बहुत-२ बधाई ..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    आभार……आशीर्वाद बनाये रखें…….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
03/04/2012

कैसी विडंबना है की ये लोग सब जानते बुझते भी मोसेरे भाई बने हैं. शर्म नहीं आती अपने साथियों के कारनामों पर . बधाई

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    क्या करें अपनी आदत से मजबूर हैं? अभी गुलामी की आदत गयी नहीं है.

vikramjitsingh के द्वारा
03/04/2012

अजय जी, सादर, रणभेरी को छोड़िये, इन का तो दाह संस्कार भी कर चुके हैं हम, अब तो बस अस्थियाँ चुगने का समय आने वाला है, वो भी प्रवाहित करेंगे, हिंद महासागर में…….ताकि इटली तक पता चले, कि देश से गद्दारी का क्या अंजाम होता है,…… आप चिंता न करें……..आप बस ऐसे ही हौंसला बढ़ाते रहें…….. गुलामी की जंजीरें तोडनी हमें आती हैं…… जय हिंद……..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    विक्रम भईया, स्वागत है…..हम कहाँ चिंता करते हैं. जब आप हैं तो हमको कौनो चिंता भी नहीं है. ई तो हम अपने आप को आज़मा रहे थे, हमको दहाड़ना आता है कि नहीं. वन्देमातरम…… प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्…….

minujha के द्वारा
03/04/2012

बहुत अच्छा अजय जी ये भाव  हर भारतीय दिल में हों देश की  आज यही पुकार है,……..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    वन्देमातरम…… सराहना के लिए धन्यवाद्…….

nishamittal के द्वारा
03/04/2012

जोरदार शब्दों में देश हित अपने विचार रखने पर बधाई .बहुत प्रेरक आह्वान.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    03/04/2012

    मेरे विचारों पर सहमति के लिए आप का हार्दिक आभार……


topic of the week



latest from jagran