Guru Ji

हजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

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हंगामा क्यूँ है बरपा........

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हंगामा क्यूँ है बरपा……..
हाँ भईया ई रेल बजट क्या पेश हुआ हंगामा ही मच गया. हमारे रेल मंत्री महोदय ने तो बहुत ही शायराना अंदाज में बजट पेश किया…. रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की….. रोजगार देने की बात की….नई रेल-गाड़ियों के संचालन की बात की….यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं की बात की….रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई की व्यवस्था की बात की….वैक्यूम टायलेट शुरू करने की बात की…स्टेशनों पर ‘घुमंतू सीढ़ी’(एस्केलेटर) लगवाने की बात की…अपने कर्मचारियों को बेहतर सुविधा देने की बात की…वेटिंग-लिस्ट के बोझ को कम करने के लिए अतिरिक्त रेल-गाड़ियों के संचालन की बात की… यानि कि सिर्फ और सिर्फ रेलवे के विकास की बात की… रेलवे की प्रगति की बात की….
अब ई बातों-बातों में कौन सी बात हो गयी कि हंगामा खड़ा हो गया… बहुतों ने कहा, बढ़िया रेल बजट… किसी ने कहा साहसिक बजट तो किसी ने कहा जांबाज बजट….किसी ने कहा गैर-राजनीतिक बजट…रेल-मंत्री जी को अनेकों बधाईयाँ मिलीं….तो फिर क्यों यह रेल की छुक-छुक, धुक-धुक में बदल गयी…. मंत्री जी की रेल ‘डिरेल’ हो गयी… हमारी दीदी बौखला क्यों गयीं….. क्या हो गया कि दीदी का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया….रेल-मंत्री महोदय को ‘धोखेबाज़’ तक कहलवा दिया…वर्षों पुरानी यारी ‘तकरार’ में बदल गयी…. बात यहाँ इस कदर बढ़ गयी कि ममता दीदी ने प्रधानमंत्री महोदय के पास ‘रेल मंत्री महोदय से इस्तीफा ले लेने की चिट्ठी’ तक लिख डाली. समाचारों में भी आ गया कि रेल-मंत्री महोदय का इस्तीफा…जबकि हमारे रेलमंत्री महोदय उन्ही की पार्टी से हैं…
हुआ यूँ… रेलमंत्री महोदय ने दीदी की अनुमति लिए बिना ही रेल किराये में वृद्धि कर दी…कहने लगे कि मैंने रेलवे को आइ सी यू से बहार निकला है. मैं रेलवे का विकास चाहता हूँ. रेलवे को प्रगति के पथ पर ले जाना मेरा उद्देश्य है.
बस यहीं चूक गए मंत्री महोदय…. दीदी के हिसाब से रेलवे सिर्फ पश्चिम-बंगाल का है. आप ने पश्चिम-बंगाल के लिए कुछ खास किया ही नहीं… पूरे देश को देखने की क्या जरुरत थी…यदि किराया बढ़ाना जरुरी ही था तो पश्चिम-बंगाल को छोड़ कर…
यदि सुविधा देना ही था तो दीदी और पूरे पश्चिम-बंगाल के साथ-साथ अन्य नेता-मंत्री जी लोगों के लिए देते…उनके रिश्तेदारों..उनके पट्टीदारों..उनके सगे-सम्बन्धियों..उनके दोस्त-मित्रों के लिए सुविधा प्रदान किया होता… फ्री का आना-जाना, फ्री का रहना खाना…. भूखे-नंगों को सुविधा देने की बात कह कर कौन सा बहादुरी का काम कर लिया…
रेलवे प्लेटफार्म को हवाई-अड्डा जैसा बना के क्या करेंगे… कौनो ट्रेन से नेता-अभिनेता चलता है क्या…. जब नेता-अभिनेता नहीं चलता तो ‘एस्केलेटर’ लगवाने की क्या जरुरत… पता नहीं कौन से ‘टायलेट’ की बात करते हैं…रेलवे लाइन के किनारे की खाली जमीन किस काम आएगी…..
जनता तो पहले से पायदान पर और ट्रेन की छत पर बैठ कर चलने की आदी है,नयी ट्रेन चलाने की क्या जरुरत थी…. सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देने की ‘कौनो’ जरुरत नहीं थी… ट्रेनें लड़तीं हैं तो लड़ने देते..हमारे ‘पाकेटमार’ बंधुओं का क्या होगा… ‘जहरखुरान’ बंधुओं का क्या होगा…‘डकैत’ बंधू तो बर्बाद हो जायेंगे…यहाँ तो ऐसे ही हजारों रोज मरते हैं… हज़ार-दो हज़ार और सही…. . आपके इस कदम से कितनी बेरोजगारी बढ जाएगी आप को नहीं पता…बड़े आये रोजगार देने वाले…..
अरे.. रेलवे गरीबों की सवारी है….यहाँ ‘माननीयों’ की व्यवस्था करेंगे तो ऐसा ही होगा….
हो गयी न ‘हेकड़ी’ ख़तम…पड़ गए न लेने के देने…अपनी तो किरकिरी कराये ही,पूरी सरकार की ही किरकिरी करा बैठे…. चले थे रेलवे को आइ सी यू से निकालने…खुद की नेतागिरी ही आइ सी यू में जाते हुए दिखाई दे रही है…
कौन जरुरत थी किराया बढ़ाने की…. दीदी से सलाह-मशविरा किया होता…,दीदी की बात मानी होती….दीदी-दीदी रट लगये होते……
आपकी ‘एमबीए’ डिग्री बेकार…जाईये इस देश के ‘स्कूल ऑफ़ नेतागिरी से ‘नेतागिरी’ की डिग्री ले कर आईये……



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53 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Liberty के द्वारा
11/07/2016

The Ships’s Vogy&esa#8230;I believe engineering just can make it worse. Now there’s a channel to by no means care, now there is not going to be a likelihood for them to find….

yamunapathak के द्वारा
28/03/2012

बहुत खूब

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    28/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद्..

surendr shukl bhramar के द्वारा
27/03/2012

ट्रेनें लड़तीं हैं तो लड़ने देते..हमारे ‘पाकेटमार’ बंधुओं का क्या होगा… ‘जहरखुरान’ बंधुओं का क्या होगा…‘डकैत’ बंधू तो बर्बाद हो जायेंगे…यहाँ तो ऐसे ही हजारों रोज मरते हैं… हज़ार-दो हज़ार और सही…. . तो अजय बंधू जी निगाहें आप को ढूंढते ढूंढते आज आप से रूबरू हो ही गयीं जय श्री राधे …सुन्दर व्यंग्य अच्छा लेख आँखें खोल देने वाला लेकिन न जाने इस रेल बिभाग की नींद कब टूटेगी ऐ सी कोच में काक्रोच मच्छर विस्तर का ऐसे वैसे पकड़ा देना धुलाई के पैसे खा लेना खाने के खुराक और गुणवत्ता क्या क्या लिखा जाए …सार्थक लेख भ्रमर ५

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    27/03/2012

    भ्रमर जी राधे-राधे. हम तो धन्य हो गए प्रभु जो आप हमारे यहाँ पधारे. लिखना भी सार्थक हो गया. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद्..

Rajesh Dubey के द्वारा
27/03/2012

आपकी रचना ने मुझे भी नेतागिरी की डिग्री के लिए प्रेरित कर दिया. एक छुपा सत्य पाकेटमारी, जहरखुरानी, डकैती पर बहुत ही सुन्दर ढंग से आपने प्रकाश डाला है. सुन्दर रचना.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    27/03/2012

    राजेश जी, देरी किस बात की है. आप भी नेतागिरी की डिग्री ले ही लीजिये. प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार…..

minujha के द्वारा
24/03/2012

अजय जी ,देरी के लिए क्षमा चाहुंगी बहुत ही अच्छा व्यंग,बिल्कुल सटीक  चित्रण .

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    26/03/2012

    मीनू जी आप क्षमा मांग कर क्यों शर्मिंदा कर रहीं हैं. यह मेरा सौभाग्य है कि आप मेरे ब्लॉग पर आयीं. मुझे तो सदैव ही आप सब विद्वानों के मार्गदर्शन की आकांक्षा लगी रहती है. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्.

rahulpriyadarshi के द्वारा
22/03/2012

नमस्कार,बहुत ही मजेदार अंदाज में आपने ताजा राजनैतिक हालातों पर चुटकी ली है,बहुत अच्छा लगा,जो बेचैनी रेल का किराया बढ़ने पर देखने को मिली,काश वैसी कभी महंगाई,रसोई गैस के दाम आदि के बढ़ने पर हुयी होती तो कलेजे को ठंडक पड़ जाती.यह एक जबरदस्त हिट(?) राजनीतिक नौटंकी रही,देखना है ऐसे तमाशे आगे कब तक चलेंगे,आपने बहुत ही बढ़िया लिखा है,आपको साधुवाद :)

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    22/03/2012

    मेरे ब्लॉग पर आगमन के लिए एवं प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद्, दिल थाम के बैठे रहिये, अभी बहुत से तमाशे देखने को मिलेंगे. यह हमारे देश की राजनीति है.

    nishamittal के द्वारा
    23/03/2012

    बहुत करार व्यंग्य और आक्रोश व्यक्त करता आलेख

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    23/03/2012

    आदरणीय निशा जी, प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद्.

Munish Dixit के द्वारा
22/03/2012

बहुत सटीक लिखा आपने दुबे जी,

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    22/03/2012

    दीक्षित जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

sanjay dixit के द्वारा
21/03/2012

सटीक और प्रासंगिक

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    21/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

20/03/2012

अजय भाई रेलवे और उसके राजनीति पर बहुत ही सटीक, सामयिक और तीखा व्यंग ! मुबारकबाद !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    21/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् डा. साहब. मेरे अन्दर इतनी योग्यता कहाँ है. यह सब आप लोगों का आशीर्वाद है. भोले-नाथ की कृपा है कि लिखते समय सरस्वती का वास हो जाता है. और जो कुछ लिखता हूँ वह आप सब को पसंद आ जाता है. पुनः धन्यवाद्…….

jalaluddinkhan के द्वारा
20/03/2012

व्यंगात्मक लहजे में आप बड़ी बातें कहने में माहिर हैं.इसबार भी आपने भारतीय रेल और रेल बजट पर पर चुभती टिपण्णी की है.बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    20/03/2012

    श्रीमान, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……. माहिर कहाँ हूँ, एक छोटी सी कोशिश है.

19/03/2012

अजय भाई, कभी फुर्सत मिले तो मेरी प्रेम कहानी जरुर पढ़ना चाहें और उस पर अपना बेशकीमती सुझाव भी प्रदान करें, बहुत छोटे में लिखने की कोशिश किया हूँ फिर भी कहानी लम्बी खिंच गयी है. इसलिए चाहूँगा कि आप पूरी कहानी पढ़कर ही प्रतिक्रिया व्यक्त करें…. http://merisada.jagranjunction.com/2012/02/15/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%81-%E0%A4%B8/

alkargupta1 के द्वारा
18/03/2012

बहुत अच्छा व्यंग्य किया है……उत्तम रचना अजय जी !

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/03/2012

    अल्का जी नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्…….

ANAND PRAVIN के द्वारा
17/03/2012

अजय जी, नमस्कार भारतीय रेल ……………हर जगह फेल…………. भारतीय रेल का असली रुबाब देखना हो तो कभी उसके अधिकारियों से मिलिए ……. तो पता चलेगा की कितने कर्मठ और कामकाजी……………चोर है सब के सब……………बाकी तो भगवान् ही मालिक है………..जय हो

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/03/2012

    प्रवीण भाई नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……. जय हो.. जय हो….

Harish Bhatt के द्वारा
17/03/2012

अजय जी नमस्ते, वाह क्या बात है बहुत ही शानदार.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/03/2012

    भट्ट साहब नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्…….

Bhardwaj Mishra के द्वारा
17/03/2012

9 साल में रेलवे के किराये में एक बार वृद्धि तो इतनी चिल्ल पों ……………सिर्फ दिखावा है ! बढ़िया लेख अजय जी

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/03/2012

    धन्यवाद् मिश्रा जी

के द्वारा
17/03/2012

9 साल में रेलवे के किराये में एक बार वृद्धि तो इतनी चिल्ल पों ……………सिर्फ दिखावा है ! बढ़िया लेख अजय जी

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    18/03/2012

    धन्यवाद् ……

chandanrai के द्वारा
17/03/2012

आदरणीय महोदय बहुत बेहतर विश्लेषण और उत्तम विचार ! भावनाएं सीधे हृदय को छूती हैं Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/मेरे लहू का कतरा कतरा तिरंगा

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    17/03/2012

    बहुत सुन्दर आलेख,अजय जी.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    धन्यवाद्……

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    19/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्…….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
17/03/2012

रेल बजट और मंत्री जी का स्वागत है , बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    धन्यवाद् सर,

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
17/03/2012

बहुत सटीक लिखा आपने दुबे जी,रेल पिछले कई वर्षों से या तो बिहार की है या बंगाल की.ये क्षत्रप अपने खोल से कब पूरे बाहर निकालेंगे. इन्हें ये समझाना बहुत जरूरी हो गया है कि बिहार और बंगाल के बाहर भी हिंदुस्तान है. रेल हम सभी की है, मात्र आपकी क्षेत्रीय राजनीति के लिए इसका दुरुपयोग कब तक? इसी सम्बन्ध में मेरे विचार पढने का कष्ट करें.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    भूपेश जी नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……. आप के लेखों को मैं सदैव पढ़ता हूँ.

abodhbaalak के द्वारा
17/03/2012

अजय जी सुन्दर व्यंग, बड़ी ही कुशलता से आपने इस ……….. ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    अबोध जी नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्…….

dineshaastik के द्वारा
17/03/2012

करारा व्यंग…..

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्,

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
16/03/2012

रेलवे बज़ट के वहाने आप ने अच्छा व्यंग्य- बिम्ब प्रस्तुत किया है |बधाई !!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    पुनः प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् आचार्य जी.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
16/03/2012

achha

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    धन्यवाद् आचार्य जी.

16/03/2012

सादर नमस्कार! सशक्त आलेख,……अजय भाई ! कटु और सटीक व्यंग्य. आपका यह आलेख पढ़कर मैं तो हतप्रभ हूँ…..मेरी नज़र में, इस बार के ‘ब्लॉगर ऑफ़ द वीक’ है आप……हार्दिक आभार.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    नमस्कार बंधू, ऐसा कुछ खास तो मैंने नहीं लिखा है.

akraktale के द्वारा
16/03/2012

अजयजी, कई गरीब विरोधी फैसलों पर चुप रहने वाली ममता जी समझने लगी हैं की रेल मंत्रालय उनके घर का है.सिर्फ राजनितिक रोटियाँ सेंकने की आदत जो पड़ गयी है देश के विकास से क्या लेना देना. अब जब कोई समर्थन नहीं मिला तो खुद ही चुप भी हो गयी हैं.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    17/03/2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्, ममता जी को हर बात में टांग अड़ाने की आदत पद गयी है. हमें तो लगता है सठिया गयीं गईं..


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