Guru Ji

हजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

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Ajay Kumar Dubey


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Posted On: 16 Aug, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Ajay Kumar Dubey Ajay Kumar Dubey

प्रिय दूबे जी ये भी खूब रही भई हम तो बिना सुने बिना न्योता दिए ही पधार गए थे हाँ ये है की कुछ खर्च न किये न कराये जनाब से जैसे वे आनंद प्रवीण हैं वैसे ही मै भी आनंद विभोर हो भ्रमर सा उड़ते मन में लड्डू खाया और बधाईयाँ दे डालीं ..न हींग लगी न फिटकरी और रंग चोखा ....ह हा .... लेकिन आप की बातों में दम तो है ही ....खैर… .ज़नाब को मेरी याद आई…मैंने भी सोचा बधाई वाली पोस्ट न सही, उनकी दर्द भरी दास्ताँ को आप सब के सामने रख ही दूं…आखिर मित्र ही कैसा… जो तकलीफ में साथ न दे…. अच्छा किया दर्द उभरा सीने से निकला ...विरह में वो भी नयी शादी की विरह में प्राण पखेरू व्याकुल तो हो ही जाते हैं ...उनको हमारी शुभ कामना देना जल्दी से दो दिल मिलें तीन हो जाएँ आँखें चार से छः हो जाएँ .. भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

आदरणीय jj , नमस्कार आज सुबह से आलेख “अन्ध्रेरे के आधार पर विकास करता झारखण्ड ” जिसने आपने featured ” में डाला हुआ है जिसे सुश्री खुसबू जी ने अपने विचार कह के पोस्ट किया हुआ है … वो पूरा का पूरा आलेख टाइप (चोरी ) किया हुआ है प्रथम पैर को छोड़ के … सीर्फ आकड़ा होता तो मैं आपके संज्ञान में नहीं लाती क्योंकि इस तरह के आलेख के लिए आकडे कहीं न कहीं से उठाने होते है . पर चुकी महोदया ने पूरा आलेख ही चोरी का टाइप कर दिया है और संदर्भ भी नहीं दिया है … तो सवाल उठाना स्वाभविक है / आपके जानकारी के लिए बता दू इस आलेख की लेखिका अनुपमा जी है .. जो मर्ज कुछ , दवा कुछ ” के नाम से “तहलका ” के अंक 31may2012 में प्रकाशित है .. चूँकि आप ने सुबह से इसे फीचर किया हुआ है और कल को आप इसे बेस्ट ब्लॉग अफ डी विक भी कर देंगे … तो जानना चाहती हूँ आपकी नजर में ये कहाँ तक उचित है .. क्या जो अपनी स्वरचित और लिखित लेख लिखते हैं क्या उनके साथ नाइंसाफी नहीं होगी .. तो फिर हम भी क्यों मेहनत करे … http://kg16.jagranjunction.com/2012/05/23/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%b0

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

"कौन जरुरत है मोटर गाड़ी से चलने की. देह-देह पर तो गाड़ी रखे हो….बाबूजी स्कूटर से चलेंगे…भईया जी मोटरसायकिल से….बेटवा-बिटिया स्कूटी से… पूरा परिवार कार से…… जब नबाबों का शौक पालोगे तो ऐसा ही होगा. अभी तो पेट्रोल छुआया है आगे-आगे देखते जाओ क्या-क्या छुआते......... अरे छोडो मोटर-गाड़ी से चलना. पैदल चलो….साईकिल से चलो…देखते नहीं थे हमारे पुरनिया कैसे मीलों पैदल ही चले जाया करते थे. सेर भर सतुआ (सत्तू) गमछा में बांधे और चल पड़े……ले लउरिया चल देउरिया….उनसे कुछ सीख लो….विजन 20-20 का सपना मत देखो. उनीसवीं सदी में लौट चलो…बहुत सुकून मिलेगा…." मैं तो बस नतमस्तक हो गया भैया जी.......कमाल का व्यंग्य....यह दूसरा मौका है इस मंच पर किसी व्यंग्यात्मक आलेख का....जो सीधे दिल को चरती हुई .....नशों में समां गयी......आश्चर्य की बात है कि दोनों इस कदर प्रभावित करने वाले व्यंग्यात्मक आलेख आप ही द्वारा सृजित........ तो एक बार प्रेम से बोलो महान भारतीय लोकतांत्रिक गणराज्य की........................!राजनेताओं की ... ............! और अंत में हम महान प्रजाओं की ......................! हाँ..................हाँ...........हाँ..........!

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

क्या सरिता जी, आप भी न.... मेरा आशय आपको शर्मिंदा करना नहीं था. क्षमा चाहता हूँ. संभवतः एक-दो बार ही आपकी प्रतिक्रिया प्राप्त हुयी है इसलिए मैंने ऐसा कह दिया. आप सब की छत्र-छाया में ही तो मुझे कुछ सीखना है. आप सब का मार्ग-दर्शन , प्रोत्साहन ही मेरा संबल है, आधार है. सदैव ही मार्ग-दर्शन की आकांक्षा रहती है. मैं कोई बहुत बड़ा विद्वान नहीं हूँ. आप लोगों की प्रेरणा और आशीर्वाद से ही कुछ न कुछ लिख जाता हूँ. आगे भी आपके मार्ग-दर्शन की प्रतीक्षा रहेगी..... हाँ मेरे लिखने का अंदाज़ कुछ अलग है, ठेठ गंवई है, जो कि बहुत से लोगों को अच्छा नहीं लगता होगा. आपने अपना बहुमूल्य समय प्रदान किया , आपका हार्दिक आभार.......

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: satish3840 satish3840

रिश्वत लेना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है…हमारी खानदानी परंपरा है……हमारे लाखों दलाल बंधुओं का का होगा ……जो काम ले- दे कर घर बैठे ही करा देते थे…….आंदोलन के चलते रिश्वत प्रथा बंद हो गई, तो लोगों के काम कैसे होंगे……? बैंक..कचहरी…रेल….जैसे सभी कार्यालय के लोग यदि रिश्वत लेना बंद कर देंगे तो उनका जीना दुश्वार ही होगा, हमारा भी जीना हराम हो जायेगा…अब कौन बैंक में…रेल में …..लाइन लगाएगा….सारी की सारी आराम-तलबी ख़तम हो जाएगी…… अब कैसे होंगे सारे काम……..? प्रिय अजय जी व्यंग्य का पुट लिए सार्थक लेख ...अभी तक सब लिखते ही आ रहे हैं जब ट्रेन ..बैंक ..आदि में घंटी बजाना शुरू कर देंगे तो इन भ्रष्टाचारियों को दिन में तारे नजर आयेंगे ..आएगा वो दिन .. आप का शीर्षक तो और कहीं खींचे जा रहा था ....जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

प्रिय आनंद पर्वत जी ...... सप्रेम नमस्कारम ! हमारे कालेज में हम एक दर्जन मुश्टंडे अबोध बालको का ग्रुप हुआ करता था जिसमे की आधे एक नजदीकी शहर से आया करते थे ..... (कालेज की पढ़ाई के बाद ) हमारे शहर के हम छह बालको में फूट पड़ गई ..... लेकिन उन दूसरे छह अबोध बालको के हमारे शहर में आने पर हमने कभी भी उनके सामने खुद को अलग -२ प्रदर्शित नहीं किया –चाहे उनके वापिस चले जाने के बाद हम फिर से “चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाए हम छह” गाना गाने लगते थे ..... मेरी इस सच्ची कहानी में जो ट्विस्ट है क्योंकि उसमे अहम नहीं है इसलिए वोह आपको लुभा सकती है ..... लेकिन जिनकी तरफ इशारा किया गया है वोह सभी तरह की आधुनिक बीमारियो से गृस्त है ..... बहुत ही बेहतरीन रचना पर मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

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प्रिय अजय जी ...... सप्रेम नमस्कारम ! आपके इस लेख को मिली रेटिंग्स इस बात को ज़ाहिर कर रही है की देश भले ही जागरूक न हुआ हो लेकिन ब्लागर्स जरूर जागरूक हो गए है ..... जोकि किसी हद तक अच्छी बात कही जानी चाहिए ....... रही बात बिक जाने की तो हम जो चुनावो के वक्त अपनी वोट बेचते है तभी तो इन नेताओं को देश को बेचने का बेशकीमती मौका मिलता है..... सिस्टम को बदलने की बात समाज में जाग्रति लाये बिना + उसको जागरूक किये बिना कोई भी रंग नहीं ला सकती है ..... ओजस्वी लेख पर मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

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के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

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के द्वारा: sanjay dixit sanjay dixit

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के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: Acharya Vijay Gunjan Acharya Vijay Gunjan

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के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

के द्वारा: ajaydubeydeoria ajaydubeydeoria

आज कोई सीधे पोस्टिंग नहीं हो पा रही है, सोचा आप दोनों के साथ हो लूँ. अजय भाई, क्या सरिफों के सराफत के मुख पर तमाचा मारते हो यार......बस तमाचा लगते रहिये. पीछे से हम ताली के लिए है. बाकि का काम लोग स्वयं कर लेंगे यदि थोडा भी शर्म बाकि होगा तो....यदि पूर्ण रूप से बेशर्म हो गए होंगे......तो उसका भी जवाब हमारे कुछ भाई और बहन, इस मंच पर है. धीरे-धीरे आप भी जान जायेंगे. मैं चाहता हूँ कि हम सभी जो समाज के आंतरिक स्वरुप में बदलाव चाहते है, वो एक साथ हो और एक ऐसी सेना का निर्माण करें जिसका हरेक सैनिक अपने आप में सेनापति हो. यदि आप मेरे साथ है तो हाथ मिलाइये......हम सबको कबीर और गाँधी के सपनों को साकार रूप देना है......

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

के द्वारा: डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज" डॉ॰ सूर्या बाली "सूरज"

अजय जी आपने सही कहा चाहे हमने आज कितनी भी तरक्की कर ली है फिर भी मानसिकता वही है आज भी समाज में बेटियो की तुलना में बेटों का स्थान श्रेष्ट मन जाता है .अभी भी कई स्थानों पर गर्भ में ही कन्या भूर्ण की हत्या कर दी जाती है ...मैंने एक जगह खुशवंत सिंह जी का एक लेख देखा था मै उसे यहाँ सबके साथ शेयर करना चाहूंगी इसलिए नहीं कि मै खुद एक स्त्री हु वरन ये एक सच्चाई भी है ..... महिलाओं की तारीफ में :..... हम महिलाओं को जो कुछ देते हैं उसके बदले में वे हमें उससे ज्यादा ही लौटाती हैं यदि आप उन्हें प्यार दें तो वे आपको संतान देती हैं यदि आप उन्हें मकान दें तो वे आपको घर देती हैं यदि आप उन्हें अनाज दें तो वे आपको भोजन देती हैं यदि आप उन्हें मुस्कराहट दें तो वे आपको अपना दिल दे देती हैं हम उन्हें जो कुछ भी दें बदले में वे हमें कुछ ज्यादा ही लौटाती हैं इसलिए यदि हम उन्हें कोई छोटी-मोटी तकलीफ दें तो हमें एक बहुत बड़ी मुसीबत के लिए तैयार रहना चाहिए। Source: खुशवंत सिंह(सौजन्य : कर्नल विनय नरूला, नई दिल्ली)

के द्वारा: D33P D33P

सादर नमस्कार, भाई! जिस तरह से आप अपनी बात को रखते है. वो काबिले तारीफ है. सामाजिक मुद्दों को समाज के सामने रखने की आपकी और मेरी शैली काफी कुछ मिलती है. बहुत अच्छा लगता है, आप जैसे लोगों का साथ पाकर. यदि आप जैसे लोग इस दुनिया में है तो बदलाव निश्चित है. एक अनुरोध है आपसे यदि इसे आप मेरी गुस्ताखी न समझे तो. आप लेख लिखते समय जितना चाहें उदहारण लीजिये, अपनी बात कहने को अच्छी बात है. परन्तु एक लेख में एक ही मुद्दा उठाईये, इससे सामने वालें को समझने में आसानी होती है. नहीं तो कभी-कभी ऐसा होता है कि कहना चाहते है कुछ और, सामने वाला कुछ और ही समझ लेता है....वैसे आपके भाव और अभिव्यक्ति का कोई जवाब नहीं......एक बार फिर आपका हार्दिक आभार.

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

अजय जी आपका यह ब्लॉग देखबर बेहद खुशी हुई, जागरण जंक्शन पर यह जो लड़ाई चल रही थी इसका कोईमतलब नही था लेकिन आर अन शाही जी के एक ब्लॉग फीचर ना होने से अन्य लोगों का इस कदर असंतोष जताने बेहद अफसोस जनक है. हम सब जानते हैं जागरण जंक्शन का मंच हमें लिखने और विचारों की अभिंव्यक्ति की आजादी देता है. यहां का फीचर सेक्शन हमारे बेहतरीन ब्लॉगों को लोगों की नजर में लाने का सर्वोत्तम टूल है लेकिन हैं तो यह तकनीकी चीज ना. अब एक तकनीकी चीज या मान लिया किसी व्यक्ति से ही गलती हो गई तो उसके लिए इतना हो-हल्ला क्या. अगर इतना ही रोष था तो लेखक को एक और बेहतरीन रचना लिख खुद को साबित करना चाहिए था. किसी पर दबाव डाल कर अपने ब्लॉगों को फीचर तो करवाया जा सकता है लेकिन इससे हमारी लेखनी को कोई खास फायदा नहींहोता, आपके ब्लॉग के लिए धन्यवाद

के द्वारा: jack jack




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